उत्तराखंड में धर्म आधारित हिंसा की घटनाएँ चिंताजनक, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग तेज
देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड में हाल के दिनों में धर्म के आधार पर मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाओं ने सामाजिक सौहार्द पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अलग-अलग स्थानों पर सामने आई घटनाओं को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में चिंता और आक्रोश का माहौल देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि एक मामले में खेत में नमाज़ अदा कर रहे एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार और मारपीट की घटना सामने आई, वहीं हरिद्वार क्षेत्र में एक ट्रक चालक के साथ भी भीड़ द्वारा मारपीट किए जाने का मामला चर्चा में है। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कानून व्यवस्था और सामाजिक शांति को लेकर बहस तेज हो गई है।
इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ समाजसेवी व मंगलोर विधायक काजी निजामुद्दीन ने पुलिस महानिदेशक, उत्तराखंड को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज करने, पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सदैव शांति, भाईचारे और आपसी सद्भाव की भूमि रहा है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग मिलजुलकर रहते आए हैं। ऐसी घटनाएं राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाने के साथ सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और किसी भी प्रकार की भीड़ हिंसा या धर्म के नाम पर मारपीट को सख्ती से रोकना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
प्रदेशवासियों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि दोषियों के खिलाफ त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई कर राज्य में कानून के राज और सामाजिक सौहार्द को हर हाल में कायम रखा जाए।
उत्तराखंड की पहचान शांति, सद्भाव और कानून व्यवस्था से है — इसे बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
