जामा मस्जिद बढेड़ी राजपुताना में मिलाद-ए-मुस्तफ़ा ﷺ की रौनक़

Listen to this article

📌 जामा मस्जिद बढेड़ी राजपुताना में मिलाद-ए-मुस्तफ़ा ﷺ की रौनक़

 

बढेड़ी राजपुताना (विशेष संवाददाता राव अमजद अली ):

आज जामा मस्जिद बढेड़ी राजपुताना में एक ऐसा रूहानी मंजर देखने को मिला जिसने हर दिल को मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ से भर दिया। जैरे सरपरस्ती हज़रत सैय्यद सादाब मियाँ की रहनुमाई में हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की 1500वीं विलादत शरीफ़ के मौके पर एक यादगार मिलाद व जिक्र-ए-नबी ﷺ की महफ़िल का शानदार आयोजन किया गया।

 

🌿 आग़ाज़

 

महफ़िल की शुरुआत क़ारी साहब की तिलावत-ए-नाते-ए-पाक से हुई, जिनकी दिलनशीन आवाज़ ने माहौल को रूहानी बना दिया।

 

उसके बाद नौजवान नातख़्वानों ने नात-ए-रसूल ﷺ पेश कीं। “नबी-ए-पाक ﷺ” की शान में गूंजते कलाम ने महफ़िल में एक जज़्बाती और रूहानी कैफ़ियत पैदा कर दी।

 

 

🌿 तक़रीरात

 

सैय्यद सादाब मियाँ ने अपने ख़ास खिताब में फरमाया:

“रहमतुल्लिल आलमीन ﷺ की विलादत सारी इंसानियत के लिए रहमत है। आज उम्मत को चाहिए कि वह नबी-ए-पाक ﷺ की सीरत को अपनी ज़िंदगी में उतारे और मोहब्बत, इंसाफ़ और भाईचारे का पैग़ाम पूरी दुनिया में फैलाए।”

 

उन्होंने कहा कि इस्लाम का असल पैग़ाम मोहब्बत और अम्न है, और यही नबी-ए-करीम ﷺ की तालीमात की रूह है।

 

🌿 शिरकत

 

इस मिलाद-ए-मुस्तफ़ा ﷺ में बड़ी तादाद में अकीदतमंदों, ने शिरकत की।

 

बच्चे, नौजवान और बुज़ुर्ग सब इश्क़-ए-रसूल ﷺ के रंग में रंगे नज़र आए।

 

देर रात तक मस्जिद दरूद-ओ-सलाम और नातों की सदा से गूंजती रही।

 

 

🌿 समापन

 

महफ़िल के आखिर में मुल्क-ए-हिंदुस्तान की तरक़्क़ी, अम्न-ओ-अमान, भाईचारे और पूरी उम्मत-ए-मुसलिमा की सलामती के लिए ख़ास दुआ की गई।

 

🌹 महफील में मौलाना अरशद रजा, राव फरमान उर्फ़ भूरा, राव सलीम,राव रियाज, राव रागिब उर्फ़ मंगता, राव वरिश, राव बिलाल,राव अमजद अली आदि अक़ीदतमंद मौजूद रहे

Related posts

Leave a Comment